Fistula ayurvedic treatment in pcmc

भगंदर(fistula) और बवासीर दोनों बहुत ही अलग-अलग रोग है। अगर आप भगंदर(fistula) को बवासीर स्वरूप समझ रहे हैं तो यह बहुत बड़ी गलतफहमी है। भगंदर वह रोग जिसमें दो ओपनिंग साइनस के द्वारा जुड़ी होती है। और यह अगर गुदा के पास हो तो उसे एनल फिश्तुला या भगंदर कहलाते हैं। पहले इसमें गुदा के आसपास एक फोड़ी बन जाती है जिसमें बहुत दर्द रहता है उसमें से थोड़े दिन के बाद में बस भी निकलता है। यहां फोड़ी फूट जाने के बाद में दर्द पूरी तरीके से गायब हो जाता है मगर इस का अंदरूनी हिस्सा अंदर के गुदाद्वार के पास कहीं तो खुला हुआ होता है जिसके वजह से यह हर 2 या 3 महीने में एक बार फोड़ी भरकर फूटती है। इसे भगंदर(fistula) कहा जाता है।

स्त्रियों में कभी-कभी इसका एक भाग योनि में खुलता है कभी कभार नॉर्मल डिलीवरी होते समय फिस्टुला या भगंदर स्त्रियों में बन जाता है।

भगंदर(Fistula) के कारण (Fistula Causes in Hindi):-​

भगंदर (fistula) ज्यादातर गुदा या उससे जुड़ी हुई समस्याओं से पैदा होता है जैसे अंदरूनी कौन से भी प्रकार का इंफेक्शन हो जाए तो वह इंफेक्शन बढ़कर सुरंग पैदा कर देता है और वह सुरंग गुदा के आसपास फोड़ी निर्माण कर कर उसमें से वह इंफेक्शन बाहर फेंकने की कोशिश करता है। इसके अलावा कई भौतिक या शारीरिक कारण भगंदर (fistula) को पैदा कर सकता है।

  • कॉन्स डिजीज (Chronis Disease)
  •  टीबी या एड्स से पीड़ित होने पर।
  • आंतों की परत पर सूजन।
  • गुदा के आसपास किसी चीज
  • का ऑपरेशन होने पर जैसे डिलीवरी के वक्त वहां पर टांके लेने के बाद।
  • धूम्रपान या शराब का सेवन ज्यादा होने पर।

भगंदर के लक्षण ( Fistula Symptoms in Hindi):-

इस रोग की पहचान कुछ शारीरिक लक्षणों से की जा सकती है जैसे –

* गुदा के आसपास बार-बार फोड़ा पैदा होकर दर्द और पुय उत्पत्ति हो रही हो।

* गुदा के आसपास ज्यादा दर्द।

* कभी-कभी हल्का हल्का खून की आशंका।

* गुदा के आसपास छेद होना और उसमें से दुर्गंध युक्त पूय का स्त्राव होना।

* बार-बार कब्ज होना मल त्याग करते समय ज्यादा जलन महसूस होना।

भगंदर के प्रकार (Types Of Fistula):-

१. सामान्य या जटिल फिस्टुला(complex fistula)

२. लो या हाई फिस्टुला (Low or Fistula)

डॉक्टर की जांच से इसका प्रकार समझ में आता है और इसकी जटिलता भी इसमें समझ में आती है कभी-कभी अंदरूनी एक फोड़ा के पीछे दो सुरंगे छिपी होती है रुग्ण अगर ज्यादा देर दर्द घर पर ही सहते रहता है तो सामान्य फिस्टुला (fistula)भी जटिल बन जाता है।

यदि आपको फिस्टुला (Fistula) उपचार की आवश्यकता है, तो आपको पीसीएमसी में प्रज्ञा आयुर्वेदिक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में डॉ. नयनिशा देसाई के पास जाना चाहिए।

About Dr. Nyanisha Desai- Director Of Pradnya Ayurveda

 

प्रज्ञा आयुर्वेदिक मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल (Pradnya Ayurveda Multispecialisty) की निदेशक डॉ. नयनिशा देसाई हैं। 2009 में, उन्होंने आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, पेठ वडगाँव, कोल्हापुर में अपना BAMS पूरा किया। वह 2011 से चिंचवड, पुणे में आयुश्री आयुर्वेदिक क्लिनिक और पंचकर्म केंद्र में अभ्यास कर रही हैं। फिर उन्होंने 2018 में प्रज्ञा आयुर्वेद मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, इंद्रायणी नगर भोसरी की स्थापना की, जिसका उद्देश्य समग्र चिकित्सा के शुद्ध और प्राकृतिक तरीके से रोगियों का इलाज करना था। उन्हें इनफर्टिलिटी और एनोरेक्टल थेरेपी का विशेष अनुभव है।